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mahabharat 14.42.2: सभी जीव इन पाँच महाभूतों से अर्थात् इनके शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध से मोहित रहते हैं ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  14.42.2 
तेषु भूतानि मुह्यन्ति महाभूतेषु पञ्चसु।
शब्दस्पर्शनरूपेषु रसगन्धक्रियासु च॥ २॥
 
 
अनुवाद
सभी जीव इन पाँच महाभूतों से अर्थात् इनके शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध से मोहित रहते हैं ॥2॥
 
All living beings remain fascinated by these five great elements, that is, their words, touch, form, taste and smell. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)