Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.42.13-14: कान, त्वचा, नेत्र, स्राव, पाँचवाँ नासिका तथा हाथ, पैर, गुदा, उपस्थ और वाणी - ये दस इन्द्रियों का समूह है। मन ग्यारहवाँ है। मनुष्य को पहले इस समुदाय को जीतना चाहिए। उसके बाद ही उसे ब्रह्म का साक्षात्कार होता है। 13-14॥ | mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कान, त्वचा, नेत्र, स्राव, पाँचवाँ नासिका तथा हाथ, पैर, गुदा, उपस्थ और वाणी - ये दस इन्द्रियों का समूह है। मन ग्यारहवाँ है। मनुष्य को पहले इस समुदाय को जीतना चाहिए। उसके बाद ही उसे ब्रह्म का साक्षात्कार होता है। 13-14॥
Ear, skin, eyes, secretion, fifth nostril and hands, feet, anus, presence and speech - these are the group of ten senses. Mind is eleventh. Man must first conquer this community. After that he realizes Brahma. 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥