श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.42.12 
एकादश च यान्याहुरिन्द्रियाणि विशेषत:।
अहंकारात् प्रसूतानि तानि वक्ष्याम्यहं द्विजा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
द्विजवरो! अब मैं अहंकार से उत्पन्न होने वाली मन सहित ग्यारह इन्द्रियों का विशेष रूप से वर्णन करूँगा, सुनो॥12॥
 
Dwijvaro! Now I will specifically describe the eleven senses including the mind which are born out of ego, listen. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)