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mahabharat 14.42.1: ब्रह्माजी बोले - महर्षि! अहंकार से पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और पाँचवीं ज्योति - ये पाँच महाभूत उत्पन्न हुए। 1॥   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  14.42.1 
ब्रह्मोवाच
अहंकारात् प्रसूतानि महाभूतानि पञ्च वै।
पृथिवी वायुराकाशमापो ज्योतिश्च पञ्चमम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - महर्षि! अहंकार से पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और पाँचवीं ज्योति - ये पाँच महाभूत उत्पन्न हुए। 1॥
 
Brahmaji said – Maharishi! From ego, the five great elements – earth, air, sky, water and the fifth light – were born. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)