श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 40: महत्तत्त्वके नाम और परमात्मतत्त्वको जाननेकी महिमा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.40.4 
सर्वत:पाणिपादश्च सर्वतोऽक्षिशिरोमुख:।
सर्वत: श्रुतिमाँल्लोके सर्वं व्याप्य स तिष्ठति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
परमेश्वर के सब ओर हाथ-पैर, सब ओर नेत्र, सब ओर सिर और मुख तथा सब ओर कान हैं; क्योंकि वह सबमें व्याप्त होकर जगत् में स्थित है ॥4॥
 
The Supreme Being has hands and legs, eyes, head and mouth on all sides and ears on all sides; because He exists in the world pervading everything. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)