Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.4.11: वह ब्राह्मणों में भक्ति रखता था, सत्य बोलता था, बाहर-भीतर पवित्र रहता था और मन तथा इन्द्रियों को वश में रखता था। उस बुद्धिमान राजा पर प्रजा का विशेष स्नेह था, जो सदैव धर्म में तत्पर रहता था। 11॥ | mahabharat अध्याय 14.4: मरुत्तके पूर्वजोंका परिचय देते हुए व्यासजीके द्वारा उनके गुण, प्रभाव एवं यज्ञका दिग्दर्शन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मण्य: सत्यवादी च शुचि: शमदमान्वित:।
प्रजास्तं चान्वरज्यन्त धर्मनित्यं मनस्विनम्॥ ११॥
अनुवाद
वह ब्राह्मणों में भक्ति रखता था, सत्य बोलता था, बाहर-भीतर पवित्र रहता था और मन तथा इन्द्रियों को वश में रखता था। उस बुद्धिमान राजा पर प्रजा का विशेष स्नेह था, जो सदैव धर्म में तत्पर रहता था। 11॥
He had devotion towards Brahmins, spoke the truth, remained pure inside and out and kept his mind and senses under his control. The people had special affection for that wise king who was always engaged in religion. 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥