श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  14.39.6 
व्यतिरिक्तं तमो यत्र तिर्यग् भावगतं भवेत्।
अल्पं तत्र रजो ज्ञेयं सत्त्वमल्पतरं तथा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तिर्यग् योनियों में जहाँ तमोगुण की अधिकता हो, वहाँ रजोगुण थोड़ा और सत्वगुण बहुत थोड़ा समझना चाहिए ॥6॥
 
Where there is excess of Tamo Guna in Tiryagy Yonis, there should be considered a little Rajo Guna and very little Sattva Guna. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)