श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  14.39.3 
यावत्सत्त्वं रजस्तावद् वर्तते नात्र संशय:।
यावत्तमश्च सत्त्वं च रजस्तावदिहोच्यते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि जब तक इस संसार में सत्वगुण विद्यमान है, तब तक रजोगुण भी विद्यमान है और जब तक तमोगुण विद्यमान है, तब तक सत्व और रजोगुण भी विद्यमान हैं, ऐसा कहा गया है। ॥3॥
 
There is no doubt that as long as Sattva Guna exists in this world, Rajo Guna also exists and as long as Tamo Guna exists, Sattva and Rajo Guna also exist, so it is said. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)