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mahabharat 14.39.23-24: प्रकृति को तम, व्यक्त, शिव, धम्म, रज, योनि, सनातन, प्रकृति, विकार, प्रलय, प्रधान, प्रभाव, आपय, अनुदृक्त, अनुन, अकामप, अचल, ध्रुव, सत्, असत्, अव्यक्त और त्रिगुण कहा जाता है। अध्यात्म का चिंतन करने वाले लोगों को इन नामों का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। 23-24॥   |   mahabharat अध्याय 14.39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  14.39.23-24 
तमो व्यक्तं शिवं धाम रजो योनि: सनातन:।
प्रकृतिर्विकार: प्रलय: प्रधानं प्रभवाप्ययौ॥ २३॥
अनुद्रिक्तमनूनं वाप्यकम्पमचलं ध्रुवम्।
सदसच्चैव तत् सर्वमव्यक्तं त्रिगुणं स्मृतम्।
ज्ञेयानि नामधेयानि नरैरध्यात्मचिन्तकै:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
प्रकृति को तम, व्यक्त, शिव, धम्म, रज, योनि, सनातन, प्रकृति, विकार, प्रलय, प्रधान, प्रभाव, आपय, अनुदृक्त, अनुन, अकामप, अचल, ध्रुव, सत्, असत्, अव्यक्त और त्रिगुण कहा जाता है। अध्यात्म का चिंतन करने वाले लोगों को इन नामों का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। 23-24॥
 
Nature is called Tam, Vyakta, Shiva, Dham, Raja, Yoni, Sanatan, Prakriti, Vikar, Pralay, Pradhan, Prabhava, Apaya, Anudrikta, Anun, Akamap, Achal, Dhruva, Sat, Asat, Avyakt and Triguna. People who contemplate spirituality should acquire the knowledge of these names. 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)