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mahabharat 14.39.21: इस संसार में जो भी वस्तु भिन्न-भिन्न स्थानों में भिन्न-भिन्न रूपों में उपलब्ध है, वह सब त्रिगुणमय है। ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 14.39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  14.39.21 
पर्यायेण प्रवर्तन्ते तत्र तत्र तथा तथा।
यत्किंचिदिह लोकेऽस्मिन् सर्वमेते त्रयो गुणा:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में जो भी वस्तु भिन्न-भिन्न स्थानों में भिन्न-भिन्न रूपों में उपलब्ध है, वह सब त्रिगुणमय है। ॥21॥
 
In this world whatever thing is available in different places in different forms, all of it is trigunamay (three gunas). ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)