vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन
»
श्लोक 2
श्लोक
14.39.2
अन्योन्यमथ रज्यन्ते ह्यन्योन्यं चार्थजीविन:।
अन्योन्यमाश्रया: सर्वे तथान्योन्यानुवर्तिन:॥ २॥
अनुवाद
ये सभी एक दूसरे से प्रभावित, एक दूसरे पर निर्भर और एक दूसरे का अनुसरण करने वाले हैं॥2॥
All of these are inter-coloured, inspired by each other, inter-dependent and follow one another.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×