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mahabharat 14.39.2: ये सभी एक दूसरे से प्रभावित, एक दूसरे पर निर्भर और एक दूसरे का अनुसरण करने वाले हैं॥2॥   |   mahabharat अध्याय 14.39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  14.39.2 
अन्योन्यमथ रज्यन्ते ह्यन्योन्यं चार्थजीविन:।
अन्योन्यमाश्रया: सर्वे तथान्योन्यानुवर्तिन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
ये सभी एक दूसरे से प्रभावित, एक दूसरे पर निर्भर और एक दूसरे का अनुसरण करने वाले हैं॥2॥
 
All of these are inter-coloured, inspired by each other, inter-dependent and follow one another.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)