श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  14.39.17 
स्थावरेषु तु भावेषु तिर्यग्भावगतं तम:।
राजसास्तु विवर्तन्ते स्नेहभावस्तु सात्त्विक:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
स्थावर प्राणियों में तामस गुण अधिक होता है; उनमें वृद्धि की प्रक्रिया राजस होती है और चिकनाई सात्त्विक होती है ॥17॥
 
In stationary creatures the Tamas Guna is more; the process of growth in them is Rajas and the smoothness is Sattvik. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)