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mahabharat 14.39.16: इस प्रकार तीनों गुण समस्त ज्योतियों में भिन्न-भिन्न प्रकार से क्रमशः प्रकट और लुप्त होते रहते हैं ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 14.39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  14.39.16 
एवं ज्योतिष्षु सर्वेषु निवर्तन्ते गुणास्त्रय:।
पर्यायेण च वर्तन्ते तत्र तत्र तथा तथा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार तीनों गुण समस्त ज्योतियों में भिन्न-भिन्न प्रकार से क्रमशः प्रकट और लुप्त होते रहते हैं ॥16॥
 
In this manner, in all the lights the three Gunas appear and disappear respectively in different ways. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)