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mahabharat 14.38.4: जो मनुष्य समस्त प्रकार के सांसारिक ज्ञान, स्वार्थ, सेवा और श्रम को व्यर्थ जानकर कल्याण के साधनों में लगा रहता है, वह परलोक में शाश्वत सुख प्राप्त करता है ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 14.38: सत्त्वगुणके कार्यका वर्णन और उसके जाननेका फल   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 38: सत्त्वगुणके कार्यका वर्णन और उसके जाननेका फल  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.38.4 
मुधा ज्ञानं मुधा वृत्तं मुधा सेवा मुधा श्रम:।
एवं यो युक्तधर्म: स्यात् सोऽमुत्रात्यन्तमश्नुते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य समस्त प्रकार के सांसारिक ज्ञान, स्वार्थ, सेवा और श्रम को व्यर्थ जानकर कल्याण के साधनों में लगा रहता है, वह परलोक में शाश्वत सुख प्राप्त करता है ॥4॥
 
Knowing that all kinds of worldly knowledge, selfish behaviour, service and labour are futile, one who engages himself in means for welfare attains everlasting happiness in the next world. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)