Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.38.15: इस सत्त्वगुण का विशेष रूप से वर्णन किया गया और सत्त्वगुण का कार्य भी समझाया गया। जो व्यक्ति इन गुणों को जानता है, वह इनका सदैव भोग करता है, परन्तु इनसे बंधता नहीं। 15॥ | mahabharat अध्याय 14.38: सत्त्वगुणके कार्यका वर्णन और उसके जाननेका फल । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रकीर्तिता: सत्त्वगुणा विशेषतो
यथावदुक्तं गुणवृत्तमेव च।
नरस्तु यो वेद गुणानिमान् सदा
गुणान् स भुङ्क्ते न गुणै: स युज्यते॥ १५॥
अनुवाद
इस सत्त्वगुण का विशेष रूप से वर्णन किया गया और सत्त्वगुण का कार्य भी समझाया गया। जो व्यक्ति इन गुणों को जानता है, वह इनका सदैव भोग करता है, परन्तु इनसे बंधता नहीं। 15॥
This Sattva Guna was specifically described and the function of Sattva Guna was also explained. The person who knows these qualities always enjoys them, but does not get tied to them. 15॥
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि गुरुशिष्यसंवादेऽष्टत्रिंशोऽध्याय:॥ ३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें गुरु-शिष्य-संवादविषयक अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥