Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.38.12-13h: सत्वगुण से युक्त महात्मा लोग स्वर्ग के देवताओं के समान ईशित्व, वशित्व और लघिमा आदि मानसिक सिद्धियाँ प्राप्त करते हैं। वे ऊर्ध्वस्रोत और वैकारिक देवता माने जाते हैं। 12 1/2॥ | mahabharat अध्याय 14.38: सत्त्वगुणके कार्यका वर्णन और उसके जाननेका फल । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ईशित्वं च वशित्वं च लघुत्वं मनसश्च ते।
विकुर्वते महात्मानो देवास्त्रिदिवगा इव॥ १२॥
ऊर्ध्वस्रोतस इत्येते देवा वैकारिका: स्मृता:।
अनुवाद
सत्वगुण से युक्त महात्मा लोग स्वर्ग के देवताओं के समान ईशित्व, वशित्व और लघिमा आदि मानसिक सिद्धियाँ प्राप्त करते हैं। वे ऊर्ध्वस्रोत और वैकारिक देवता माने जाते हैं। 12 1/2॥
Sattva Guna-filled Mahatmas attain mental attainments like Ishitva, Vashitva and Laghima etc. like the heavenly gods. He is considered to be a vertical source and a Vaikarik deity. 12 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥