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mahabharat 14.36.9: रजोगुण प्रकृति का स्वरूप कहा गया है, यह जगत् की उत्पत्ति का कारण है। इसकी प्रवृत्ति सभी प्राणियों में देखी जाती है। यह दृश्यमान जगत् इसका स्वरूप है, सृष्टि या प्रवृत्ति इसका लक्षण है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 14.36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  14.36.9 
प्रकृत्यात्मकमेवाहू रज: पर्यायकारकम्।
प्रवृत्तं सर्वभूतेषु दृश्यमुत्पत्तिलक्षणम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
रजोगुण प्रकृति का स्वरूप कहा गया है, यह जगत् की उत्पत्ति का कारण है। इसकी प्रवृत्ति सभी प्राणियों में देखी जाती है। यह दृश्यमान जगत् इसका स्वरूप है, सृष्टि या प्रवृत्ति इसका लक्षण है॥9॥
 
Rajoguna is said to be the form of nature, it is the reason for the creation of the universe. Its tendency is seen in all beings. This visible world is its form, creation or tendency is its characteristic.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)