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mahabharat 14.36.3: उसमें तीन स्रोत (चेतना रूपी नदी के प्रवाह) तीन गुणयुक्त नाड़ियों द्वारा बार-बार भरे और प्रवाहित होते रहते हैं ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 14.36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  14.36.3 
त्रीणि स्रोतांसि यान्यस्मिन्नाप्यायन्ते पुन: पुन:।
प्रनाडॺस्तिस्र एवैता: प्रवर्तन्ते गुणात्मिका:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उसमें तीन स्रोत (चेतना रूपी नदी के प्रवाह) तीन गुणयुक्त नाड़ियों द्वारा बार-बार भरे और प्रवाहित होते रहते हैं ॥3॥
 
The three sources (flows of the river of consciousness) in it are filled and flowed again and again by the three quality-filled channels. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)