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mahabharat 14.36.29: जो मनुष्य पुनरावर्ती सकाम धर्म का अभ्यास करते हैं और भगवत्प्राप्ति करके दूसरे जन्म में जाते हैं, वे यहाँ (मृत्युलोक में) मनुष्य बनते हैं। 29॥   |   mahabharat अध्याय 14.36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  14.36.29 
अन्यथा प्रतिपन्नास्ते विबुद्धा: स्वेषु कर्मसु।
पुनरावृत्तिधर्माणस्ते भवन्तीह मानुषा:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य पुनरावर्ती सकाम धर्म का अभ्यास करते हैं और भगवत्प्राप्ति करके दूसरे जन्म में जाते हैं, वे यहाँ (मृत्युलोक में) मनुष्य बनते हैं। 29॥
 
Those human beings who practice recursively sakaam dharma and go to another life after attaining godliness, then they become human beings here (in the world of death). 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)