Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.36.19: व्यर्थ कार्य आरम्भ करना (निर्धारित विधि और श्रद्धा का पालन किए बिना), व्यर्थ दान देना (स्थान, समय और व्यक्ति का ध्यान किए बिना) और व्यर्थ भोजन करना (देवताओं और अतिथियों को अर्पित किए बिना) भी तामसिक कर्म हैं। | mahabharat अध्याय 14.36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वृथारम्भा हि ये केचिद्वृथा दानानि यानि च।
वृथा भक्षणमित्येतत् तामसं वृत्तमिष्यते॥ १९॥
अनुवाद
व्यर्थ कार्य आरम्भ करना (निर्धारित विधि और श्रद्धा का पालन किए बिना), व्यर्थ दान देना (स्थान, समय और व्यक्ति का ध्यान किए बिना) और व्यर्थ भोजन करना (देवताओं और अतिथियों को अर्पित किए बिना) भी तामसिक कर्म हैं।
Starting useless activities (without following the prescribed method and faith), giving useless donations (without paying heed to the place, time and person) and eating useless food (without offering it to the gods and guests) are also Tamasic acts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥