Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.36.17-18: सदैव देवताओं, ब्राह्मणों और वेदों की निन्दा करना, दान न देना, अहंकार, मोह, क्रोध, असहिष्णुता और प्राणियों के प्रति दया- ये सब तामस आचरण हैं ॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 14.36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  14.36.17-18 
परिवादकथा नित्यं देवब्राह्मणवैदिकी॥ १७॥
अत्यागश्चाभिमानश्च मोहो मन्युस्तथाक्षमा।
मत्सरश्चैव भूतेषु तामसं वृत्तमिष्यते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सदैव देवताओं, ब्राह्मणों और वेदों की निन्दा करना, दान न देना, अहंकार, मोह, क्रोध, असहिष्णुता और प्राणियों के प्रति दया- ये सब तामस आचरण हैं ॥17-18॥
 
Always criticizing Gods, Brahmins and Vedas, not giving charity, pride, attachment, anger, intolerance and pity towards living beings – all these are Tamasic behaviour. 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)