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mahabharat 14.36.10: समस्त तत्त्वों में प्रकाश, शील (अभिमानशून्यता) और श्रद्धा - यह सत्त्वगुण का स्वरूप है। महापुरुषों ने अभिमानशून्यता की प्रशंसा की है॥10॥   |   mahabharat अध्याय 14.36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  14.36.10 
प्रकाशं सर्वभूतेषु लाघवं श्रद्दधानता।
सात्त्विकं रूपमेवं तु लाघवं साधुसम्मितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
समस्त तत्त्वों में प्रकाश, शील (अभिमानशून्यता) और श्रद्धा - यह सत्त्वगुण का स्वरूप है। महापुरुषों ने अभिमानशून्यता की प्रशंसा की है॥10॥
 
Light in all elements, modesty (pridelessness) and faith - this is the form of Sattva Guna. Pridelessness has been praised by great men.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)