Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.36.1-2: ब्रह्माजी बोले - महर्षि! जब तीनों गुण साम्य में होते हैं, उस समय उसका नाम अव्यक्त स्वभाव है। अव्यक्त समस्त प्राकृतिक कार्यों में व्यापक, अविनाशी और स्थिर है। जब उपर्युक्त तीनों गुणों में विसंगति होती है, तब वे पंचभूत का रूप धारण कर लेते हैं और उनसे नौ द्वारों वाला एक नगर (शरीर) निर्मित होता है, ऐसा जानिये। इस मंदिर में मन सहित ग्यारह इन्द्रियाँ हैं जो आत्मा को विषयों की ओर प्रेरित करती हैं। इन्हें मनकों के माध्यम से व्यक्त किया गया है। बुद्धि इस नगर की स्वामिनी है, ग्यारहवाँ मन दस इन्द्रियों से श्रेष्ठ है। 1-2॥ | mahabharat अध्याय 14.36: ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्माजी बोले - महर्षि! जब तीनों गुण साम्य में होते हैं, उस समय उसका नाम अव्यक्त स्वभाव है। अव्यक्त समस्त प्राकृतिक कार्यों में व्यापक, अविनाशी और स्थिर है। जब उपर्युक्त तीनों गुणों में विसंगति होती है, तब वे पंचभूत का रूप धारण कर लेते हैं और उनसे नौ द्वारों वाला एक नगर (शरीर) निर्मित होता है, ऐसा जानिये। इस मंदिर में मन सहित ग्यारह इन्द्रियाँ हैं जो आत्मा को विषयों की ओर प्रेरित करती हैं। इन्हें मनकों के माध्यम से व्यक्त किया गया है। बुद्धि इस नगर की स्वामिनी है, ग्यारहवाँ मन दस इन्द्रियों से श्रेष्ठ है। 1-2॥
Brahmaji said – Maharshi! When all three qualities are in balance, at that time its name is latent nature. Avyakt is pervasive, indestructible and stable in all natural works. When there is a discrepancy in the above mentioned three qualities, then they take the form of Panchabhuta and from them a city (body) with nine doors is formed, know this. In this temple there are eleven senses including the mind which inspire the soul towards objects. These have been expressed through beads. Wisdom is the mistress of this city, the eleventh mind is superior to the ten senses. 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥