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mahabharat 14.35.8: हे ब्राह्मण! सभी जीव किससे अपना जीवन धारण करते हैं? उनकी अधिकतम आयु क्या है? सत्य और तप क्या है? सज्जन पुरुषों ने किन गुणों की प्रशंसा की है?॥8॥   |   mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.35.8 
केन जीवन्ति भूतानि तेषामायुश्च किं परम्।
किं सत्यं किं तपो विप्र के गुणा: सद्भिरीरिता:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! सभी जीव किससे अपना जीवन धारण करते हैं? उनकी अधिकतम आयु क्या है? सत्य और तप क्या है? सज्जन पुरुषों ने किन गुणों की प्रशंसा की है?॥8॥
 
O Brahmin! What do all living beings sustain their life from? What is their maximum age? What is truth and austerity? Which qualities have been praised by the noble men?॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)