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mahabharat 14.35.6: हे महाबुद्धिमान कुरुश्रेष्ठ अर्जुन! गुरु के ऐसा कहने पर गुरु के प्रिय शिष्य ने हाथ जोड़कर जो पूछा, उसे सुनो॥6॥   |   mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.35.6 
इत्युक्त: स कुरुश्रेष्ठ गुरुणा गुरुवत्सल:।
प्राञ्जलि: परिपप्रच्छ यत्तच्छृणु महामते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे महाबुद्धिमान कुरुश्रेष्ठ अर्जुन! गुरु के ऐसा कहने पर गुरु के प्रिय शिष्य ने हाथ जोड़कर जो पूछा, उसे सुनो॥6॥
 
Great wise Kurus, best Arjun! Listen to what the Guru's beloved disciple asked with folded hands when the Guru said this. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)