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mahabharat 14.35.49: जो सम्पूर्ण तत्त्वों की उत्पत्ति और प्रलय को ठीक-ठीक जानता है, वह समस्त प्राणियों में सबसे अधिक धैर्यवान है और कभी मोह में नहीं पड़ता ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  14.35.49 
तत्त्वानामथ यो वेद सर्वेषां प्रभवाप्ययौ।
स धीर: सर्वभूतेषु न मोहमधिगच्छति॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जो सम्पूर्ण तत्त्वों की उत्पत्ति और प्रलय को ठीक-ठीक जानता है, वह समस्त प्राणियों में सबसे अधिक धैर्यवान है और कभी मोह में नहीं पड़ता ॥49॥
 
He who knows precisely the origin and dissolution of all elements is the most patient of all creatures and never falls into temptation. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)