Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.35.44: विद्वानों ने श्रद्धा को धर्म का मुख्य लक्षण बताया है। इस प्रकार आपको दिव्य मार्ग बताए गए हैं। धैर्यवान संत अपने कर्मों द्वारा धर्म की मर्यादा का पालन करते हैं। 44॥   |   mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  14.35.44 
श्रद्धालक्षणमित्येवं धर्मं धीरा: प्रचक्षते।
इत्येवं देवयाना व: पन्थान: परिकीर्तिता:।
सद्भिरध्यासिता धीरै: कर्मभिर्धर्मसेतव:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
विद्वानों ने श्रद्धा को धर्म का मुख्य लक्षण बताया है। इस प्रकार आपको दिव्य मार्ग बताए गए हैं। धैर्यवान संत अपने कर्मों द्वारा धर्म की मर्यादा का पालन करते हैं। 44॥
 
Scholars have described faith as the main characteristic of religion. In this way the divine paths have been described to you. Patient saints follow the limits of religion through their actions. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)