Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.35.41: जब तक आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त नहीं होता, तब तक मनुष्य प्रकाश, आकाश, वायु, सूर्य, इन्द्र और प्रजापति आदि का वास्तविक तत्त्व नहीं जानता (इनका वास्तविक ज्ञान आत्मज्ञान प्राप्त होने पर होता है)। 41॥ | mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ज्योतिराकाशमादित्यो वायुरिन्द्र: प्रजापति:।
नोपैति यावदध्यात्मं तावदेतान् न पश्यति॥ ४१॥
अनुवाद
जब तक आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त नहीं होता, तब तक मनुष्य प्रकाश, आकाश, वायु, सूर्य, इन्द्र और प्रजापति आदि का वास्तविक तत्त्व नहीं जानता (इनका वास्तविक ज्ञान आत्मज्ञान प्राप्त होने पर होता है)। 41॥
Unless one attains spiritual knowledge, man does not know the true essence of light, sky, air, sun, Indra and Prajapati etc. (the true knowledge of these is attained after attaining self-knowledge). 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥