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mahabharat 14.35.39: हे भाग्यवान वक्ताओं! अब यहाँ मुझसे उस अत्यंत कठिन जानने योग्य मार्ग के विषय में सुनो, जो पूर्णतः परमपद का ही स्वरूप है ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.35.39 
गदन्तस्तं मयाद्येह पन्थानं दुर्विदं परम्।
निबोधत महाभागा निखिलेन परं पदम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे भाग्यवान वक्ताओं! अब यहाँ मुझसे उस अत्यंत कठिन जानने योग्य मार्ग के विषय में सुनो, जो पूर्णतः परमपद का ही स्वरूप है ॥39॥
 
Fortunate speakers! Now listen to me here about that extremely difficult to know path, which is completely the form of the Supreme State. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)