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mahabharat 14.35.38: हे ब्राह्मणों! मैं तुम्हें उस परम कल्याणकारी और कल्याणकारी मार्ग का उपदेश देता हूँ, जिसका पूर्वकाल में बुद्धिमान पुरुषों ने आश्रय लिया है और जो ब्रह्मभाव (ब्रह्मपद) की प्राप्ति का सबसे निश्चित साधन है। इसे ध्यानपूर्वक सुनो। ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.35.38 
पन्थानं व: प्रवक्ष्यामि शिवं क्षेमकरं द्विजा:।
नियतं ब्रह्मभावाय गतं पूर्वं मनीषिभि:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणों! मैं तुम्हें उस परम कल्याणकारी और कल्याणकारी मार्ग का उपदेश देता हूँ, जिसका पूर्वकाल में बुद्धिमान पुरुषों ने आश्रय लिया है और जो ब्रह्मभाव (ब्रह्मपद) की प्राप्ति का सबसे निश्चित साधन है। इसे ध्यानपूर्वक सुनो। ॥38॥
 
O Brahmins! I am preaching to you the most auspicious and beneficial path which has been resorted to by wise men in the past and which is the surest means to attain Brahmabhaav (the state of Brahman). Listen to it carefully. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)