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mahabharat 14.35.36: मैं उन सब ब्राह्मणों के कल्याण के लिए सनातन धर्म का उपदेश करूँगा जो एक दूसरे को मर्यादा में रखते हैं, जो धार्मिक मर्यादा के प्रवर्तक हैं और जो विद्वान हैं ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.35.36 
अन्योन्यनियतान् वैद्यान् धर्मसेतुप्रवर्तकान्।
तानहं सम्प्रवक्ष्यामि शाश्वताँल्लोकभावनान्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
मैं उन सब ब्राह्मणों के कल्याण के लिए सनातन धर्म का उपदेश करूँगा जो एक दूसरे को मर्यादा में रखते हैं, जो धार्मिक मर्यादा के प्रवर्तक हैं और जो विद्वान हैं ॥36॥
 
I shall preach the eternal Dharma for the welfare of all the Brahmins, who keep each other within the rules, who are the promoters of religious decorum and who are learned. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)