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mahabharat 14.35.34: ब्रह्म सत्य है, तपस्या सत्य है और प्रजापति भी सत्य है। सभी प्राणी सत्य से उत्पन्न होते हैं। यह भौतिक जगत सत्य का स्वरूप है ॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.35.34 
ब्रह्म सत्यं तप: सत्यं सत्यं चैव प्रजापति:।
सत्याद् भूतानि जातानि सत्यं भूतमयं जगत‍्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्म सत्य है, तपस्या सत्य है और प्रजापति भी सत्य है। सभी प्राणी सत्य से उत्पन्न होते हैं। यह भौतिक जगत सत्य का स्वरूप है ॥ 34॥
 
Brahma is truth, tapasya is truth and Prajapati is also truth. All beings are born from truth. This material world is the form of truth. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)