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mahabharat 14.35.12: हम संसार से डरते हैं और मोक्ष की इच्छा रखते हैं। आपके अतिरिक्त ऐसा कोई नहीं है जो हमारे सारे संदेह दूर कर सके॥12॥   |   mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.35.12 
सर्वसंशयसंच्छेत्ता त्वदन्यो न च विद्यते।
संसारभीरवश्चैव मोक्षकामास्तथा वयम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हम संसार से डरते हैं और मोक्ष की इच्छा रखते हैं। आपके अतिरिक्त ऐसा कोई नहीं है जो हमारे सारे संदेह दूर कर सके॥12॥
 
We are afraid of the world and desire salvation. There is no one other than you who can clear all our doubts.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)