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श्लोक 14.33.7  |
बुद्ध्यायं गम्यते मार्ग: शरीरेण न गम्यते।
आद्यन्तवन्ति कर्माणि शरीरं कर्मबन्धनम्॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| यह मार्ग केवल बुद्धि से ही जाना जाता है, शरीर से इसकी प्राप्ति नहीं होती। सभी कर्मों का आदि और अंत होता है और शरीर ही कर्म का साधन है ॥7॥ |
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| This path is known only by the intellect, it cannot be attained by the body. All actions have a beginning and an end and the body is the means of action. ॥ 7॥ |
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