इस प्रकार महाप्रतापी अम्बरीष ने स्वराज्य को सर्वोपरि रखते हुए एकमात्र प्रबल शत्रु लोभ का नाश किया और उपर्युक्त श्लोक गाया।
Thus the illustrious Ambarisha, keeping the self-rule in the forefront, destroyed the only strong enemy, greed, and sang the above verse.
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि ब्राह्मणगीतासु एकत्रिंशोऽध्याय:॥ ३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें ब्राह्मणगीताविषयक इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)