Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.30.6: मन की चंचलता के कारण वह सब मनुष्यों से नाना प्रकार के कर्म कराता है; इसलिए अब मैं तीखे बाणों द्वारा मन पर ही प्रहार करूँगा ॥6॥ | mahabharat अध्याय 14.30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मन की चंचलता के कारण वह सब मनुष्यों से नाना प्रकार के कर्म कराता है; इसलिए अब मैं तीखे बाणों द्वारा मन पर ही प्रहार करूँगा ॥6॥
Due to the fickleness of the mind, it makes all human beings perform various actions; therefore, now I shall attack the mind itself with sharp arrows. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥