Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.30.30-31: राजा अलर्क को इस सफलता पर बड़ा आश्चर्य हुआ और उन्होंने यह श्लोक गाया - 'हाय! यह बड़े दुःख की बात है कि मैं अब तक बाह्य कर्मों में लगा रहा और भोगों की इच्छा से बँधा हुआ केवल राज्य की ही आराधना करता रहा हूँ। मुझे बहुत बाद में ज्ञात हुआ है कि ध्यान से बढ़कर सुख का कोई साधन नहीं है।'॥30-31॥ | mahabharat अध्याय 14.30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा अलर्क को इस सफलता पर बड़ा आश्चर्य हुआ और उन्होंने यह श्लोक गाया - 'हाय! यह बड़े दुःख की बात है कि मैं अब तक बाह्य कर्मों में लगा रहा और भोगों की इच्छा से बँधा हुआ केवल राज्य की ही आराधना करता रहा हूँ। मुझे बहुत बाद में ज्ञात हुआ है कि ध्यान से बढ़कर सुख का कोई साधन नहीं है।'॥30-31॥
King Alarka was very surprised at this success and he sang this verse - 'Oh! It is a matter of great sorrow that till now I have been engaged in external works and bound by the desire for pleasures, I have been worshipping the kingdom only. I have come to know much later that there is no better means of happiness than meditation.'॥ 30-31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥