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mahabharat 14.30.3: उन्होंने अपने धनुष की सहायता से पृथ्वी पर्यन्त समुद्र पर्यन्त विजय प्राप्त करके अत्यन्त कठिन पराक्रम किया था। इसके पश्चात् उनका मन सूक्ष्म तत्त्वों की खोज में लग गया। ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 14.30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  14.30.3 
ससागरान्तां धनुषा विनिर्जित्य महीमिमाम्।
कृत्वा सुदुष्करं कर्म मन: सूक्ष्मे समादधे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपने धनुष की सहायता से पृथ्वी पर्यन्त समुद्र पर्यन्त विजय प्राप्त करके अत्यन्त कठिन पराक्रम किया था। इसके पश्चात् उनका मन सूक्ष्म तत्त्वों की खोज में लग गया। ॥3॥
 
With the help of his bow, he had performed a very difficult feat by conquering the earth up to the sea. After this, his mind got engaged in the search of the subtle elements. ॥3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)