Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.30.27-28h: तब बलवान राजा ने एकाग्रचित्त होकर विचार करना आरम्भ किया - हे ब्रह्मन्! बहुत दिनों तक निरन्तर विचार करने के पश्चात् बुद्धिमानों में श्रेष्ठ राजा अलर्क को योग से बढ़कर कल्याण का कोई दूसरा साधन नहीं दिखा। | mahabharat अध्याय 14.30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुसमाहितचेतास्तु स ततोऽचिन्तयत् प्रभु:।
स विचिन्त्य चिरं कालमलर्को द्विजसत्तम॥ २७॥
नाध्यगच्छत् परं श्रेयो योगान्मतिमतां वर:।
अनुवाद
तब बलवान राजा ने एकाग्रचित्त होकर विचार करना आरम्भ किया - हे ब्रह्मन्! बहुत दिनों तक निरन्तर विचार करने के पश्चात् बुद्धिमानों में श्रेष्ठ राजा अलर्क को योग से बढ़कर कल्याण का कोई दूसरा साधन नहीं दिखा।
Then the powerful king began to think with full concentration. O Brahmin! After thinking for many days continuously, King Alarka, the best amongst the wise, did not find any other means of welfare better than Yoga. 27 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥