Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.30.25: बुद्धि बोली, "अलर्क! ये बाण मुझे किसी प्रकार स्पर्श नहीं कर सकते। ये तुम्हारे महत्वपूर्ण अंगों को छेद देंगे और छेदते ही तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। जिन बाणों की सहायता से तुम मुझे मार सकोगे, वे अन्य बाण हैं। उनके विषय में सोचो।"   |   mahabharat अध्याय 14.30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  14.30.25 
बुद्धिरुवाच
नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन।
तवैव मर्म भेत्स्यन्ति भिन्नमर्मा मरिष्यसि।
अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
बुद्धि बोली, "अलर्क! ये बाण मुझे किसी प्रकार स्पर्श नहीं कर सकते। ये तुम्हारे महत्वपूर्ण अंगों को छेद देंगे और छेदते ही तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। जिन बाणों की सहायता से तुम मुझे मार सकोगे, वे अन्य बाण हैं। उनके विषय में सोचो।"
 
Buddhi said, "Alarka! These arrows cannot touch me in any way. They will pierce your vital organs and when they are pierced, you will die. The arrows with the help of which you will be able to kill me are some other arrows. Think about them. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)