श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  14.30.24 
अलर्क उवाच
इयं निष्ठा बहुविधा प्रज्ञया त्वध्यवस्यति।
तस्माद् बुद्धिं प्रति शरान् प्रतिमोक्ष्याम्यहं शितान्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अलर्क बोला, "यह बुद्धि अपने ज्ञानबल से नाना प्रकार के निर्णय करती है; अतः मैं अपने तीखे बाणों से इस बुद्धि पर ही प्रहार करूँगा।"
 
Alarka said, "This intellect makes various kinds of decisions by its power of knowledge; therefore, I will attack this intellect only with my sharp arrows."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)