श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  14.30.19-20h 
श्रोत्रमुवाच
नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन।
तवैव मर्म भेत्स्यन्ति ततो हास्यसि जीवितम्॥ १९॥
अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि।
 
 
अनुवाद
श्रोत्र ने कहा- अलर्क! ये बाण मुझे किसी भी प्रकार से छेद नहीं सकते। ये तुम्हारे ही मर्मस्थानों को छेद देंगे। तब तुम अपने प्राण गँवा दोगे। अतः तुम्हें अन्य प्रकार के बाणों की खोज करनी चाहिए, जिनसे तुम मुझे मार सको॥ 19 1/2॥
 
Shrotra said- Alarka! These arrows cannot pierce me in any way. These will pierce your own vital spots. Then you will lose your life. Therefore you should search for other types of arrows, with which you can kill me.॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)