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mahabharat 14.30.18: अलर्क बोला - यह कान बार-बार नाना प्रकार की ध्वनियाँ सुनता है और उन्हीं की इच्छा करता है, इसलिए मैं इस श्रवणेन्द्रिय पर तीक्ष्ण बाण चलाऊँगा।   |   mahabharat अध्याय 14.30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.30.18 
अलर्क उवाच
श्रुत्वा तु विविधान् शब्दांस्तानेव प्रतिगृध्यति।
तस्माच्छ्रोत्रं प्रति शरान् प्रतिमुञ्चाम्यहं शितान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अलर्क बोला - यह कान बार-बार नाना प्रकार की ध्वनियाँ सुनता है और उन्हीं की इच्छा करता है, इसलिए मैं इस श्रवणेन्द्रिय पर तीक्ष्ण बाण चलाऊँगा।
 
Alarka said - This ear repeatedly hears various kinds of sounds and desires the same. Therefore I will shoot these sharp arrows at the sense of hearing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)