Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.30.13-14h: जीभ बोली, "अलर्क! ये बाण मुझे किसी भी प्रकार से छेद नहीं सकते। ये तुम्हारे प्राणों को छेद देंगे। यदि तुम्हारे प्राण छिद गए, तो तुम मर जाओगे। इसलिए दूसरे प्रकार के बाणों की व्यवस्था करने का विचार करो, जिनकी सहायता से तुम मुझे मार सकोगे।" | mahabharat अध्याय 14.30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जीभ बोली, "अलर्क! ये बाण मुझे किसी भी प्रकार से छेद नहीं सकते। ये तुम्हारे प्राणों को छेद देंगे। यदि तुम्हारे प्राण छिद गए, तो तुम मर जाओगे। इसलिए दूसरे प्रकार के बाणों की व्यवस्था करने का विचार करो, जिनकी सहायता से तुम मुझे मार सकोगे।"
The tongue said, "Alarka! These arrows cannot pierce me in any way. They will pierce your vital spots. If your vital spots are pierced, you will die. So think of arranging for other types of arrows, with the help of which you will be able to kill me. 13 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥