श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.30.12 
अलर्क उवाच
इयं स्वादून् रसान् भुक्त्वा तानेव प्रतिगृध्यति।
तस्माज्जिह्वां प्रति शरान् प्रतिमोक्ष्याम्यहं शितान्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अलर्क बोला, "यह जीभ स्वादिष्ट रस पीकर उसे पुनः प्राप्त करना चाहती है। अतः अब मैं अपने तीखे बाणों से इस पर आक्रमण करूँगा।"
 
Alarka said, "This tongue after consuming the delicious juices wants to get them again. So now I will attack it with my sharp arrows."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)