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mahabharat 14.30.10-11h: नासिका बोली, "अलर्क! ये बाण मुझे हानि नहीं पहुँचा सकते। ये तुम्हारे प्राणों को छेद देंगे और जब प्राण छिद जाएँगे, तब तुम मर जाओगे। अतः तुम अन्य प्रकार के बाणों का अनुसंधान करो, जिनसे तुम मुझे मार सकोगे।" 10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 14.30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  14.30.10-11h 
घ्राण उवाच
नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन।
तवैव मर्म भेत्स्यन्ति भिन्नमर्मा मरिष्यसि॥ १०॥
अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि।
 
 
अनुवाद
नासिका बोली, "अलर्क! ये बाण मुझे हानि नहीं पहुँचा सकते। ये तुम्हारे प्राणों को छेद देंगे और जब प्राण छिद जाएँगे, तब तुम मर जाओगे। अतः तुम अन्य प्रकार के बाणों का अनुसंधान करो, जिनसे तुम मुझे मार सकोगे।" 10 1/2॥
 
Nasika said, "Alarka! These arrows cannot harm me. They will pierce your vital organs and when your vital organs are pierced, you will die. Therefore, you should research other types of arrows, with which you will be able to kill me. 10 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)