श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीका युधिष्ठिरको अश्वमेध यज्ञके लिये धनकी प्राप्तिका उपाय बताते हुए संवर्त और मरुत्तका प्रसंग उपस्थित करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  14.3.8 
राजसूयाश्वमेधौ च सर्वमेधं च भारत।
नरमेधं च नृपते त्वमाहर युधिष्ठिर॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भरतवंशी राजा युधिष्ठिर! आप राजसूय, अश्वमेध, सर्वमेध और नरमेध यज्ञ करते हैं। 8॥
 
Bharatvanshi King Yudhishthir! You perform Rajasuya, Ashvamedha, Sarvamedha and Naramedha Yagya. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)