व्यास उवाच
यदि शुश्रूषसे पार्थ शृणु कारन्धमं नृपम्।
यस्मिन् काले महीवीर्य: स राजासीन्महाधन:॥ २३॥
अनुवाद
व्यास बोले, "पार्थ! यदि तुम सुनना चाहते हो तो करंधमा के पौत्र मरुत्त की कथा सुनो। मैं तुम्हें बता रहा हूँ कि वह अत्यंत धनवान और पराक्रमी राजा किस काल में इस पृथ्वी पर प्रकट हुआ था।"
Vyasa said, "Partha! If you wish to listen, then listen to the story of Karandhama's grandson Marutta. I am telling you in which period that very wealthy and mighty king appeared on this earth.
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अश्वमेधपर्वणि संवर्तमरुत्तीये तृतीयोऽध्याय:॥ ३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अश्वमेधपर्वमें संवर्त और मरुत्तका उपाख्यानविषयक तीसरा अध्याय पूरा हुआ॥ ३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥