युधिष्ठिर उवाच
कथं यज्ञे मरुत्तस्य द्रविणं तत् समाचितम्।
कस्मिंश्च काले स नृपो बभूव वदतां वर॥ २२॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - वक्ताओं में श्रेष्ठ महर्षि ! मरुत के यज्ञ में इतना धन कैसे एकत्रित हुआ और राजा मरुत किस समय इस पृथ्वी पर प्रकट हुए ? 22॥
Yudhishthir asked – Maharishi, the best among speakers! How was so much wealth collected in Marut's yagya and at what time did King Marut appear on this earth? 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥