श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीका युधिष्ठिरको अश्वमेध यज्ञके लिये धनकी प्राप्तिका उपाय बताते हुए संवर्त और मरुत्तका प्रसंग उपस्थित करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  14.3.13 
न तु बालानिमान् दीनानुत्सहे वसु याचितुम्।
तथैवार्द्रव्रणान् कृच्छ्रे वर्तमानान् नृपात्मजान्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यहाँ उपस्थित राजकुमार सभी बालक और दुखी हैं, वे बड़े कष्ट में हैं और उनके घाव अभी तक ठीक नहीं हुए हैं; इसलिए मैं उनसे धन नहीं माँग सकता॥13॥
 
The princes present here are all children and wretched, they are in great trouble and their wounds have not yet healed; therefore I cannot beg for money from them.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)